अंगूर की खेती A to Z जानकारी

 

अंगूर की खेती का तरीका

अंगूर की खेती (Viticulture) एक मुनाफे वाला व्यवसाय है, लेकिन इसके लिए सही तकनीक और देखभाल की आवश्यकता होती है। नीचे अंगूर की खेती की पूरी प्रक्रिया चरण-दर-चरण दी गई है:

1. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी

जलवायु: अंगूर के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सबसे अच्छी होती है। पकने के समय बारिश या अधिक नमी अंगूरों को खराब कर सकती है।

मिट्टी: जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है। मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।

2. खेत की तैयारी और रोपाई

समय: उत्तर भारत में रोपाई के लिए जनवरी से फरवरी का समय श्रेष्ठ है, जबकि दक्षिण भारत में इसे अक्टूबर-नवंबर में लगाया जाता है।

गड्ढे की तैयारी: 60 \times 60 \times 60 सेमी के गड्ढे खोदें। इनमें गोबर की खाद (FYM), नीम की खली और सुपर फास्फेट मिलाकर भरें।

दूरी: पौधों के बीच की दूरी लगभग 2 से 3 मीटर रखनी चाहिए।

3. प्रमुख किस्में

अपनी जरूरत के हिसाब से किस्म का चुनाव करें:

बीज रहित (Seedless): थॉम्पसन सीडलेस, शरद सीडलेस, फ्लेम सीडलेस।

रस और वाइन के लिए: अर्का कंचन, अर्का श्याम।

खाने के लिए: अनाब-ए-शाही, दिलखुश।

4. सहारा देना और कटाई-छंटाई (Pruning)

अंगूर एक बेल है, इसलिए इसे सहारे की जरूरत होती है।

पंडाल विधि (Bower System): यह भारत में सबसे लोकप्रिय है। इसमें लोहे या कंक्रीट के खंभों पर तारों का जाल बिछाया जाता है।

प्रूनिंग: साल में दो बार कटाई-छंटाई की जाती है।

गर्मी की छंटाई (April): नई बढ़त के लिए।

सर्दी की छंटाई (October): फलों के उत्पादन के लिए।

5. सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन

सिंचाई: अंगूर को ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) से पानी देना सबसे अच्छा होता है। फूल आने और फल बनने के समय नमी का खास ध्यान रखें।

खाद: मिट्टी परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का उपयोग करें। फल बनते समय पोटाश की अधिक आवश्यकता होती है ताकि मिठास बढ़े।

6. रोग और कीट नियंत्रण

अंगूर की फसल में मुख्य रूप से ये समस्याएं आती हैं:

डाउन मिल्ड्यू (Downy Mildew): पत्तियों पर पीले धब्बे। इसके लिए बोर्डो मिश्रण या फफूंदनाशक का छिड़काव करें।

कीट: थ्रिप्स और जैसिड्स से बचाव के लिए नीम के तेल या उचित कीटनाशक का प्रयोग करें।

7. तुड़ाई और पैदावार

अंगूर लगाने के लगभग 2 से 3 साल बाद अच्छी पैदावार शुरू हो जाती है।

जब गुच्छों का रंग किस्म के अनुसार बदल जाए और वे मीठे हो जाएं, तब इनकी तुड़ाई सुबह या शाम के ठंडे समय में करें।

प्रो टिप: फलों का आकार बढ़ाने और उन्हें चमकदार बनाने के लिए किसान अक्सर जिबरेलिक एसिड (GA_3) का संतुलित मात्रा में उपयोग करते हैं।


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