हज़रत आदम (अ.स.) से हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) तक: नबियों का मुकम्मल सिलसिला

 


हज़रत आदम (अ.स.) से हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) तक: नबियों का मुकम्मल सिलसिला

इंसानियत की हिदायत के लिए अल्लाह ताला ने समय-समय पर नबियों को भेजा। यह सिलसिला पहले इंसान और पहले नबी हज़रत आदम (अलैहि सलाम) से शुरू होकर आख़िरी नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर मुकम्मल हुआ। आइए, इस रूहानी और ऐतिहासिक सिलसिले को विस्तार से समझते हैं।

1. हज़रत आदम (अ.स.) से हज़रत इब्राहिम (अ.स.) तक

दुनिया की शुरुआत हज़रत आदम (अ.स.) से हुई। उनके बाद नबूवत का सिलसिला कई पीढ़ियों से होता हुआ हज़रत इब्राहिम (अ.स.) तक पहुँचा, जिन्हें 'अबू अल-अंबिया' (नबियों का पिता) कहा जाता है।

 यह महान सिलसिला हमें सिखाता है कि अल्लाह ने हर दौर में इंसानों को सही रास्ता दिखाने के लिए अपने नेक बंदों को भेजा। हज़रत इब्राहिम (अ.स.) की दुआ और हज़रत ईसा (अ.स.) की बशारत (खुशखबरी) हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) के रूप में पूरी हुई, जो पूरी दुनिया के लिए रहमत बनकर आए।


हज़रत आदम (अलैहि सलाम) से लेकर हज़रत इब्राहिम (अलैहि सलाम) तक का सफ़र मानव इतिहास का शुरुआती दौर है। इस्लामिक रिवायतों और इतिहासकारों (जैसे इब्ने कसीर) के मुताबिक, यह सिलसिला हज़रत नूह (अ.स.) के माध्यम से गुज़रता है, जिन्हें 'आदम-ए-सानी' (दूसरा आदम) भी कहा जाता है क्योंकि महाप्रलय (Flood) के बाद दुनिया की नस्ल उन्हीं से दोबारा शुरू हुई थी।

यहाँ मुख्य कड़ी दी गई है:

1. हज़रत आदम (अ.स.) से हज़रत नूह (अ.स.) तक

इतिहासकारों के अनुसार हज़रत आदम और हज़रत नूह के बीच लगभग 10 पीढ़ियों का अंतर था।

हज़रत आदम (अ.स.): पहले इंसान और पहले नबी।

शीश (अ.स.): हज़रत आदम के बेटे। नबूवत का सिलसिला इन्हीं से आगे बढ़ा।

अनोश / कैनन / महलैल / यारद (यह वह नाम हैं जो तारीख की किताबों में मिलते हैं)।

हज़रत इदरीस (अ.स.): हज़रत नूह से पहले के मशहूर नबी, जिन्हें कलम से लिखने और सिलाई का हुनर सबसे पहले दिया गया।

हज़रत नूह (अ.स.): इनके दौर में मशहूर 'तूफ़ान-ए-नूह' आया था।

2. हज़रत नूह (अ.स.) से हज़रत इब्राहिम (अ.स.) तक

तूफ़ान के बाद हज़रत नूह के तीन बेटों (साम, हाम और याफ़िस) से दुनिया की आबादी बढ़ी। हज़रत इब्राहिम (अ.स.) का ताल्लुक 'साम' की नस्ल से है, इसीलिए इनके खानदान को 'सामी' (Semitic) कहा जाता है।

सिलसिला इस प्रकार है:

हज़रत नूह (अ.स.)

साम (Sam)

अरफखशद

शालिख

आबिर (हज़रत हूद अलैहि सलाम): कई विद्वानों के अनुसार हज़रत हूद (अ.स.) इसी नस्ल से थे।

फ़ालिज

अर्गू

सारूग

नाहूर

तारुख़ (आज़र): यह हज़रत इब्राहिम (अ.स.) के पिता थे।

हज़रत इब्राहिम (अ.स.)

महत्वपूर्ण नबी जो इस दौरान आए:

हज़रत आदम और हज़रत इब्राहिम के बीच के दौर में कुरान में ज़िक्र किए गए प्रमुख नबी ये हैं:

हज़रत शीश (अ.स.): आदम (अ.स.) के बाद रूहानी वारिस।

हज़रत इदरीस (अ.स.): खगोल विज्ञान और गणित की शुरुआती समझ इन्हीं के दौर में आई।

हज़रत नूह (अ.स.): जिन्होंने 950 साल तक दीन की दावत दी।

हज़रत हूद (अ.स.): जो 'क़ौम-ए-आद' की तरफ भेजे गए थे।

हज़रत सालेह (अ.स.): जो 'क़ौम-ए-समूद' की तरफ भेजे गए थे (यह हज़रत इब्राहिम से कुछ समय पहले हुए थे)।

संक्षेप में सारांश (Summary Table):


हज़रत इब्राहिम (अ.स.) तक पहुँचते-पूँछते दुनिया में मूर्ति पूजा आम हो गई थी, जिसे खत्म करने के लिए अल्लाह ने उन्हें 'खलीलउल्लाह' (अल्लाह का दोस्त) के रुतबे से नवाज़ा।


    हज़रत इसहाक (अलैहि सलाम), हज़रत इब्राहिम (अ.स.) के दूसरे बेटे थे। जहाँ हज़रत इस्माइल (अ.स.) से अरब का सिलसिला चला, वहीं हज़रत इसहाक (अ.स.) से "बनी इसराइल" का महान सिलसिला शुरू हुआ। दुनिया के अधिकांश बड़े पैगंबर इसी शाख से आए हैं।

यहाँ हज़रत इसहाक (अ.स.) की औलादों का संक्षिप्त और स्पष्ट सिलसिला दिया गया है:

1. हज़रत इसहाक (अ.स.) और उनके बेटे

हज़रत इसहाक (अ.स.) के दो जुड़वां बेटे थे:

ऐसू (Esau): इनसे 'रूम' (Edomites) की नस्ल चली।

हज़रत याकूब (अ.स.): इनका दूसरा नाम 'इसराइल' था। इन्हीं के नाम पर इनके पूरे खानदान को 'बनी इसराइल' (इसराइल की संतान) कहा जाता है।

2. हज़रत याकूब (अ.स.) के 12 बेटे

हज़रत याकूब (अ.स.) के 12 बेटे थे, जिनसे बनी इसराइल के 12 कबीले वजूद में आए। इनके प्रमुख बेटों में शामिल हैं:

हज़रत यूसुफ (अ.स.): जो मिस्र के अज़ीज़ बने।

यहूदा (Judah): इनके नाम पर आगे चलकर 'यहूदी' शब्द मशहूर हुआ।

लावी (Levi): इनके खानदान में हज़रत मूसा (अ.स.) और हज़रत हारून (अ.स.) पैदा हुए।

3. इस सिलसिले के प्रमुख पैगंबर

हज़रत इसहाक (अ.स.) की नस्ल में हज़ारों साल तक नबियों का सिलसिला चलता रहा। इसे हम तीन प्रमुख दौर में समझ सकते हैं:


4. हज़रत ईसा (अ.स.) तक का खात्मा

बनी इसराइल का यह सिलसिला हज़रत ईसा (अ.स.) पर जाकर खत्म हो गया। हज़रत ईसा (अ.स.) बनी इसराइल के आखिरी नबी थे।

इसके बाद अल्लाह ताला ने नबूवत की ज़िम्मेदारी हज़रत इसहाक (अ.स.) की शाख से हटाकर दोबारा हज़रत इब्राहिम (अ.स.) के बड़े बेटे हज़रत इस्माइल (अ.स.) की शाख (हज़रत मुहम्मद सल्ल.) की तरफ मोड़ दी।

निष्कर्ष:

हज़रत इब्राहिम (अ.स.) को 'अबू अल-अंबिया' (नबियों का बाप) कहा जाता है क्योंकि:

उनकी एक शाख (इसहाक अ.स.) से बनी इसराइल के हज़ारों नबी आए।

उनकी दूसरी शाख (इस्माइल अ.स.) से तमाम नबियों के सरदार, हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) तशरीफ लाए।

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हज़रत इब्राहिम (अलैहि सलाम) से लेकर हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक का सिलसिला इतिहास और ईमान का एक बहुत ही खूबसूरत सफर है। इसे "नसब नामा" (वंश वृक्ष) कहा जाता है।

इसे समझने के लिए हमें हज़रत इब्राहिम (अ.स.) के दो बेटों के रास्तों को समझना होगा:

1. हज़रत इब्राहिम (अ.स.) के दो मुख्य बेटे

हज़रत इब्राहिम (अ.स.) की दो पत्नियाँ थीं जिनसे दो महान सिलसिले चले:

हज़रत इस्माइल (अ.स.): बड़ी बीवी हज़रत हाजरा (अ.स.) के बेटे। इनसे अरब का खानदान चला।

हज़रत इसहाक (अ.स.): बीवी हज़रत सारा (अ.स.) के बेटे। इनसे बनी इसराइल (हज़रत यूसुफ, मूसा, ईसा अ.स. आदि) का सिलसिला चला।

2. हज़रत इस्माइल (अ.स.) से 'अदनान' तक

हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) का ताल्लुक हज़रत इस्माइल (अ.स.) की नस्ल से है। हज़रत इब्राहिम (अ.स.) ने अल्लाह के हुक्म से इन्हें मक्का की वादी में बसाया था।

कई पीढ़ियों के बाद इस खानदान में "अदनान" नाम के एक बहुत मशहूर शख्स हुए। अरब के लोग अपने वंश को अदनान तक पूरी सटीकता के साथ याद रखते थे।

3. अदनान से हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) तक का शजरा

अदनान से लेकर हमारे नबी (सल्ल.) तक का सिलसिला इस प्रकार है (प्रमुख नाम):

अदनान

मअद

निज़ार

मुज़र

इल्यास

मुद्रिका

ख़ुज़ैमा

किनाना

नज़्र (क़ुरैश): इन्हीं के नाम पर कबीले का नाम 'क़ुरैश' पड़ा।

मालिक

फ़िहर

ग़ालिब

लुआई

काअब

मुर्रा

किलाब

कु़सई: इन्होंने मक्का और काबा के इंतज़ाम को दोबारा संगठित किया।

अब्द म़नाफ

हाशिम: इन्हीं के नाम से आपका खानदान 'बनी हाशिम' कहलाया।

अब्दुल मुत्तलिब: (हज़रत मुहम्मद सल्ल. के दादा)

अब्दुल्लाह: (हज़रत मुहम्मद सल्ल. के वालिद/पिता)

हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम)

मुख्य बिंदु:

इब्राहीमी दुआ: हज़रत इब्राहिम (अ.स.) ने काबा बनाते समय दुआ की थी कि उनकी औलाद में एक रसूल आए, वह दुआ हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) की शक्ल में पूरी हुई।

क़ुरैश और हाशिमी: आप (सल्ल.) का कबीला 'क़ुरैश' था और खानदान 'बनी हाशिम' था, जो पूरे अरब में सबसे सम्मानित माना जाता था।

नबी का फरमान: आप (सल्ल.) ने खुद फरमाया है, "अल्लाह ने इब्राहिम की औलाद में से इस्माइल को चुना, और इस्माइल की औलाद में से किनाना को, और किनाना में से क़ुरैश को, और क़ुरैश में से बनी हाशिम को और बनी हाशिम में से मुझे चुना।"

यह सिलसिला ज़ाहिर करता है कि आप (सल्ल.) दुनिया के सबसे ऊँचे और पाक खानदान से ताल्लुक रखते हैं।

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इन तमाम जानकारी के माध्यम से यह पता चलता है कि 

यह एक बहुत ही गहरा और दिलचस्प सवाल है। असल में, दुनिया के ये तीन बड़े धर्म—इस्लाम, ईसाइयत (Christianity), और यहूदी धर्म (Judaism)—एक ही जड़ से निकले हैं, इसीलिए इन्हें 'इब्राहीमी धर्म' (Abrahamic Religions) कहा जाता है।

इनका वजूद में आना हज़रत इब्राहिम (अ.स.) के दो बेटों के खानदानों से जुड़ा है। आइए इसे सिलसिलेवार समझते हैं:

1. यहूदी धर्म (Judaism) का वजूद

यहूदी धर्म की शुरुआत हज़रत इब्राहिम (अ.स.) के दूसरे बेटे हज़रत इसहाक (अ.स.) के खानदान से हुई।

हज़रत इसहाक के बेटे हज़रत याकूब (अ.स.) थे, जिनका लक़ब (नाम) 'इसराइल' था।

हज़रत याकूब के 12 बेटों से जो खानदान चला, उसे 'बनी इसराइल' कहा गया।

इसी खानदान में हज़रत मूसा (अ.स.) आए, जिन्हें अल्लाह ने 'तौरात' अता की। जो लोग हज़रत मूसा की शरीयत पर चले और बनी इसराइल के कबीलों से जुड़े रहे, वे 'यहूदी' कहलाए।

2. ईसाई धर्म (Christianity) का वजूद

ईसाई धर्म भी इसी 'बनी इसराइल' की शाख से निकला है।

हज़रत मूसा (अ.स.) के सैंकड़ों साल बाद, इसी बनी इसराइल के खानदान में हज़रत ईसा (अ.स.) पैदा हुए।

अल्लाह ने उन्हें 'इंजील' किताब दी। हज़रत ईसा ने यहूदियों को उनके भटकाव से रोकने और अल्लाह की तरफ बुलाने की कोशिश की।

जिन लोगों ने हज़रत ईसा (अ.स.) की पैरवी की, वे 'ईसाई' (Christians) कहलाए। ईसाइयों और यहूदियों के पूर्वज (Ancestors) एक ही हैं, बस उनके पैगंबर और किताबों को मानने का फर्क है।

3. इस्लाम धर्म (Islam) का वजूद

इस्लाम का सिलसिला हज़रत इब्राहिम (अ.स.) के बड़े बेटे हज़रत इस्माइल (अ.स.) के खानदान से जुड़ा है।

हज़रत इब्राहिम ने अपने बड़े बेटे हज़रत इस्माइल को मक्का (अरब) में बसाया था।

सदियों बाद, इसी 'बनी इस्माइल' के खानदान (क़ुरैश) में हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पैदा हुए।

अल्लाह ने उन पर 'कुरान' नाज़िल किया। इस्लाम का मानना है कि हज़रत आदम से लेकर हज़रत ईसा तक सभी नबी असल में 'मुस्लिम' (अल्लाह की आज्ञा मानने वाले) ही थे और हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) ने उसी पुराने इब्राहीमी दीन को मुकम्मल किया।

एक ही जड़, अलग रास्ते

यहूदी हज़रत मूसा तक के नबियों को मानते हैं लेकिन ईसा (अ.स.) और मुहम्मद (सल्ल.) को नहीं मानते।

ईसाई हज़रत ईसा तक के नबियों को मानते हैं लेकिन मुहम्मद (सल्ल.) को आख़िरी नबी स्वीकार नहीं करते।

मुसलमान इन सभी नबियों (आदम, नूह, इब्राहिम, मूसा, ईसा अ.स.) को अल्लाह का सच्चा नबी मानते हैं और हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) को आख़िरी रसूल मानते हैं।

यही वजह है कि इन तीनों धर्मों में कई कहानियाँ (जैसे नूह का तूफ़ान, हज़रत यूसुफ का किस्सा) एक जैसी मिलती हैं, क्योंकि इन सबकी जड़ हज़रत इब्राहिम (अ.स.) ही हैं।


- FARIDA BEE MANSURI

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