साबूदाना फैक्ट्री में कैसे बनता है? शाकाहारी है या मांसाहारी—जानें पूरा सच!

साबूदाना कैसे बनता है

 साबूदाना (Sago) को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि यह किसी पेड़ का फल है या इसे फैक्ट्रियों में बनाया जाता है। आइए, इसकी पूरी प्रक्रिया और इसकी प्रकृति को विस्तार से समझते हैं।

साबूदाना शाकाहारी है या मांसाहारी?
साबूदाना पूरी तरह से शाकाहारी (Vegetarian) है। यह एक पौधे की जड़ से मिलने वाले स्टार्च (starch) से बनाया जाता है।
हालांकि, इसके निर्माण की पुरानी और पारंपरिक प्रक्रियाओं में साफ-सफाई की कमी और खुले में सुखाने के कारण इसे लेकर कुछ विवाद हुए थे, लेकिन तकनीकी रूप से इसमें किसी भी जानवर के अंश का प्रयोग नहीं किया जाता। इसलिए, इसे व्रत और उपवास में शुद्ध शाकाहारी भोजन के रूप में उपयोग किया जाता है।
साबूदाना बनाने की पूरी प्रक्रिया
साबूदाना सीधे पेड़ों पर नहीं उगता, बल्कि इसे 'कसावा' (Cassava) नाम के पौधे की जड़ से तैयार किया जाता है, जिसे हिंदी में शकरकंद जैसा टैपिओका भी कहते हैं। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:
1. जड़ों का चयन और धुलाई
सबसे पहले टैपिओका या कसावा के पौधों की जड़ों को जमीन से निकाला जाता है। इन भारी-भरकम जड़ों को फैक्ट्रियों में ले जाकर बड़े टैंकों में धोया जाता है ताकि मिट्टी और गंदगी साफ हो जाए।
2. छिलका उतारना और पीसना
सफाई के बाद जड़ों की ऊपरी परत (छिलका) मशीन द्वारा उतारी जाती है। इसके बाद अंदर के सफेद हिस्से को मशीनों में पीसकर एक गूदा (Pulp) तैयार किया जाता है।
3. स्टार्च निकालना (निकासी)
इस गूदे को पानी के साथ मिलाकर छाना जाता है। छानने के बाद जो सफेद तरल पदार्थ (Milk-like liquid) बचता है, वही शुद्ध स्टार्च होता है। इस तरल को बड़े टैंकों में जमा होने के लिए छोड़ दिया जाता है, जिससे स्टार्च नीचे बैठ जाता है।
4. दाने बनाना (Granulation)
जमे हुए स्टार्च को सुखाकर उसका पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद इसे बड़ी मशीनों (Granulators) में डाला जाता है, जहाँ इस पाउडर को हिला-हिलाकर छोटे-छोटे गोल मोतियों का आकार दिया जाता है। यही वह अवस्था है जहाँ हमें साबूदाने के दाने मिलते हैं।
5. पकाना और सुखाना (Roasting and Drying)
इन कच्चे मोतियों को भाप (Steam) में हल्का पकाया जाता है या गरम तवों पर सेंका जाता है। इसके बाद इन्हें धूप में या बड़ी मशीनों द्वारा पूरी तरह सुखाया जाता है।
6. पॉलिशिंग
अंत में, सूखे हुए साबूदाने को पॉलिश किया जाता है ताकि उनमें चमक आ जाए और वे हमें बाजार में सफेद मोतियों की तरह दिखाई दें।
मुख्य बातें:
साबूदाना मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है।
इसमें प्रोटीन या फैट बहुत कम होता है, इसलिए यह ऊर्जा का तुरंत स्रोत माना जाता है।
भारत में साबूदाने का सबसे ज्यादा उत्पादन तमिलनाडु के सेलम (Salem) जिले में होता है।

टिप्पणियाँ