सूरह आराफ आयत 133: फिरऔन पर आए वो 5 खौफनाक अज़ाब!

 

सूरह आराफ आयत 133

सूरह अल-अराफ़ (Surah Al-A'raf) की आयत नंबर 133 का हिंदी तर्जुमा (अनुवाद) और उसका संक्षिप्त संदर्भ नीचे दिया गया है:

आयत का अरबी पाठ

فَأَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ الطُّوفَانَ وَالْجَرَادَ وَالْقُمَّلَ وَالضَّفَادِعَ وَالدَّمَ آيَاتٍ مُّفَصَّلَاتٍ فَاسْتَكْبَرُوا وَكَانُوا قَوْمًا مُّجْرِمِينَ

हिंदी तर्जुमा (अनुवाद)

"फिर हमने उन पर तूफ़ान, टिड्डियाँ, घुन (जुएं), मेंढक और खून के अज़ाब भेजे। ये सब अलग-अलग और साफ़ निशानियाँ थीं, फिर भी उन्होंने तक़ब्बुर (अहंकार) किया और वे एक मुजरिम कौम थे।"

आयत की संक्षिप्त व्याख्या (Context)

यह आयत हज़रत मूसा (अ़लैहिस्सलाम) और फिरौन के वाकये से संबंधित है। जब फिरौन और उसकी कौम ने अल्लाह के संदेश को मानने से इनकार कर दिया और मूसा (अ़लैहिस्सलाम) के चमत्कार देखने के बाद भी ज़िद पर अड़े रहे, तो अल्लाह ने उन पर क्रमिक रूप से ये पाँच मुसीबतें (निशानियाँ) भेजी थीं:

तूफ़ान: अत्यधिक बारिश और बाढ़ जिससे उनकी फसलें और घर तबाह हो गए।

टिड्डियाँ (Locusts): जिसने उनके बचे-खुचे बाग और खेती को खा लिया।

घुन या जुएं (Lice/Weevils): अनाज में कीड़े लग गए और लोगों के शरीर व बालों में जुएं पड़ गईं।

मेंढक: हर तरफ मेंढक ही मेंढक हो गए (खाने के बर्तनों से लेकर बिस्तरों तक)।

खून: उनके पानी के सोतों और कुओं का पानी खून में बदल गया।

इन स्पष्ट निशानियों के बावजूद, फिरौन की कौम ने माफी माँगने के बजाय अहंकार दिखाया, जिसके कारण अंततः उनका विनाश हुआ।

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