स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के ताजा समाचार
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) इस समय दुनिया का सबसे बड़ा 'फ्लैशपॉइंट' बना हुआ है। मार्च 2026 की ताज़ा स्थिति यह है कि ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच यहां सीधा सैन्य संघर्ष शुरू हो चुका है।
1. ताज़ा सैन्य कार्रवाई: अमेरिका के 'बंकर बस्टर' हमले
18 मार्च 2026 की सबसे बड़ी खबर यह है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के उन मिसाइल ठिकानों पर हमला किया है जो होर्मुज के तट पर स्थित हैं।
हमले का स्वरूप: अमेरिका ने पहली बार 5,000 पाउंड के 'बंकर बस्टर' (Bunker Buster) बमों का इस्तेमाल किया है। इन बमों का मकसद ईरान की उन अंडरग्राउंड मिसाइल साइट्स को तबाह करना है, जहाँ से वे अंतरराष्ट्रीय जहाजों (विशेषकर तेल टैंकरों) पर 'एंटी-शिप मिसाइलें' दाग रहे थे।
ट्रंप का रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (NATO) देशों से अपनी नौसेना भेजने की मांग की है, ताकि इस समुद्री रास्ते को फिर से खोला जा सके। हालांकि, कई यूरोपीय देशों ने इस युद्ध में सीधे शामिल होने से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
2. ईरान की 'चयनात्मक' नाकेबंदी (Selective Blockade)
ईरान ने इस जलडमरूमध्य (Strait) को पूरी तरह बंद नहीं किया है, बल्कि वह इसे एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है:
मित्र देशों को छूट: ताजा सैटेलाइट और ट्रैकर डेटा (Windward Reports) से पता चला है कि ईरान केवल उन जहाजों को जाने दे रहा है जो उसके "मित्र देश" हैं।
भारत के लिए विशेष राहत: भारत के कूटनीतिक प्रयासों के बाद, ईरान ने दो भारतीय LPG जहाजों (शिवालिक और नंदा देवी) को सुरक्षित रास्ता दिया। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत बातचीत के जरिए अपने जहाजों को निकालने में सफल रहा है।
पेट्रो-युआन का दांव: खबरें हैं कि ईरान उन जहाजों को प्राथमिकता दे रहा है जो डॉलर के बजाय चीनी मुद्रा 'युआन' में भुगतान करने को तैयार हैं। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था (पेट्रो-डॉलर) के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।
3. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का करीब 20-25% कच्चा तेल गुजरता है। इस संकट के कारण:
तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
सप्लाई चेन में रुकावट: सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देशों को अपना उत्पादन कम करना पड़ा है क्योंकि उनके तेल टैंकर बाहर नहीं निकल पा रहे हैं और उनके स्टोरेज टैंक फुल हो चुके हैं।
जहाजों का जमावड़ा: ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी के दोनों तरफ सैकड़ों जहाज लंगर डाले खड़े हैं, जो सुरक्षा की गारंटी का इंतजार कर रहे हैं।
4. संघर्ष की पृष्ठभूमि (फरवरी-मार्च 2026)
यह तनाव 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता के मारे जाने की खबरें आई थीं, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर होर्मुज को बंद करने की धमकी दी और जहाजों पर ड्रोन हमले शुरू कर दिए।
5. भारत की स्थिति और चिंताएं
भारत के लिए यह खबर बेहद संवेदनशील है क्योंकि:
भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का लगभग 50-60% इसी रास्ते से मंगवाता है।
खाड़ी देशों में अभी भी 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज फंसे हुए हैं, जिन पर करीब 611 भारतीय नाविक सवार हैं। भारत सरकार लगातार ईरान के संपर्क में है ताकि मानवीय आधार पर उन्हें निकाला जा सके।
निष्कर्ष
वर्तमान स्थिति यह है कि होर्मुज अब केवल एक समुद्री रास्ता नहीं बल्कि एक युद्ध का मैदान है। अमेरिका इसे बलपूर्वक खुलवाना चाहता है, जबकि ईरान इसे "परमिट-आधारित" रास्ता बनाकर दुनिया की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।

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