भारत में LPG गैस संकट - कारण प्रभाव पक्के समाधान
भारत में एलपीजी (LPG) संकट और उसके निवारण पर यह विस्तृत लेख वर्तमान (मार्च 2026) की भू-राजनीतिक स्थितियों और घरेलू मांग के आंकड़ों पर आधारित है।
भारत में एलपीजी (LPG) संकट: कारण, प्रभाव और समाधान
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता है। मार्च 2026 में, भारत एक गंभीर ऊर्जा चुनौती का सामना कर रहा है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों ने घरेलू रसोई तक पहुँचने वाली गैस की आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है।
1. संकट की वर्तमान स्थिति (मार्च 2026)
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60-65% हिस्सा आयात करता है। हालिया हफ्तों में, पश्चिम एशिया (विशेषकर ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष) में बढ़ते तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से होने वाली आपूर्ति बाधित हुई है। भारत का लगभग 90% एलपीजी आयात इसी मार्ग से गुजरता है।
आपूर्ति में कमी: घरेलू सिलेंडरों की डिलीवरी का समय 2-3 दिनों से बढ़कर 7-10 दिन (कुछ क्षेत्रों में 20 दिन तक) हो गया है।
मांग में उछाल: घबराहट में की गई बुकिंग (Panic Booking) के कारण दैनिक मांग 50-60 लाख सिलेंडरों से बढ़कर लगभग 90 लाख तक पहुँच गई थी।
कीमतों पर दबाव: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि हुई है।
2. संकट के प्रमुख कारण
क. भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति मार्ग
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारा है। ईरान और इजरायल के बीच सैन्य संघर्ष के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही असुरक्षित हो गई है, जिससे कतर और सऊदी अरब जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से आने वाले एलपीजी टैंकर अटक गए हैं।
ख. आयात पर अत्यधिक निर्भरता
भारत की वार्षिक एलपीजी मांग लगभग 31-33 मिलियन मीट्रिक टन (MT) है। घरेलू उत्पादन केवल 12-13 MT के आसपास रहता है, जिससे देश वैश्विक झटकों के प्रति अतिसंवेदनशील हो जाता है।
ग. रणनीतिक भंडारण की कमी
कच्चे तेल (Crude Oil) के विपरीत, भारत के पास एलपीजी के लिए गहरे रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) की कमी है। भारत के पास वर्तमान में लगभग 25-30 दिनों का ही बफर स्टॉक रहता है, जो लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की स्थिति में अपर्याप्त है।
घ. घरेलू मांग में वृद्धि (उज्ज्वला योजना)
'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (PMUY) के तहत अब तक 10.5 करोड़ से अधिक कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी की मांग कई गुना बढ़ गई है, लेकिन उसी अनुपात में बुनियादी ढांचे (रिफाइनरी और पाइपलाइन) का विस्तार नहीं हो पाया है।
3. संकट निवारण हेतु सरकार के कदम
सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है:
क. आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण (Diversification)
भारत अब केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार:
अर्जेंटीना और अमेरिका से आयात दोगुना कर दिया गया है।
रूस और ऑस्ट्रेलिया से लंबी अवधि के अनुबंध किए जा रहे हैं।
अमेरिकी मूल की एलपीजी का हिस्सा अब पारंपरिक खाड़ी देशों के बराबर पहुँच रहा है।
ख. घरेलू उत्पादन में वृद्धि
पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। घरेलू उत्पादन को 38% तक बढ़ाकर दैनिक उत्पादन 50,000 मीट्रिक टन तक पहुँचाया गया है।
ग. नौसैनिक सुरक्षा (Naval Escort)
भारतीय नौसेना 'ऑपरेशन संकल्प' के तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में भारतीय गैस टैंकरों को सुरक्षा घेरा (Escort) प्रदान कर रही है, जिससे 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' जैसे बड़े जहाजों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हुई है।
घ. मांग प्रबंधन और राशनिंग
शहरी क्षेत्रों में रिफिल बुकिंग के बीच का अंतराल बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन किया गया है ताकि जमाखोरी रोकी जा सके।
व्यावसायिक एलपीजी आपूर्ति में कटौती कर घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।
4. दीर्घकालिक समाधान और भविष्य की राह
भविष्य में ऐसे संकटों से बचने के लिए भारत को निम्नलिखित क्षेत्रों में निवेश करना होगा:
1. पाइप नेचुरल गैस (PNG) का विस्तार
एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता कम करने के लिए शहरों में पीएनजी (PNG) नेटवर्क को युद्ध स्तर पर फैलाना होगा। सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त एलपीजी कोटा देने के लिए पीएनजी सुधारों की शर्त रखी है।
2. रणनीतिक एलपीजी भंडार का निर्माण
भारत को भूमिगत गुफाओं (Salt Caverns) या बड़े टर्मिनलों में कम से कम 90 दिनों का एलपीजी भंडार विकसित करने की आवश्यकता है।
3. 'बिजली से रसोई' (E-Cooking) को बढ़ावा
सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा से चलने वाले इंडक्शन चूल्हों को बढ़ावा देकर गैस आयात बिल को कम किया जा सकता है। सरकार उज्ज्वला लाभार्थियों को सब्सिडी पर ई-कुकिंग किट देने पर विचार कर सकती है।
4. बायोगैस और संपीड़ित बायोगैस (CBG)
ग्रामीण क्षेत्रों में पशु अपशिष्ट से बायोगैस बनाने के संयंत्रों (SATAT योजना) को तेजी से लागू करना होगा, ताकि स्थानीय मांग स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो सके।
निष्कर्ष
भारत में 2026 का एलपीजी संकट एक चेतावनी है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए आयात पर निर्भरता जोखिम भरी है। समाधान केवल आपूर्ति बढ़ाने में नहीं, बल्कि ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को अपनाने और रणनीतिक भंडारण क्षमता को मजबूत करने में निहित है।

टिप्पणियाँ