आज भारतीय शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट
आज, 23 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार (Sensex और Nifty) में भारी गिरावट दर्ज की गई। BSE Sensex लगभग 1,836 अंक (2.46%) गिरकर 72,696 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 में 601 अंकों (2.60%) की बड़ी गिरावट देखी गई और यह 22,512 के स्तर पर आ गया।
इस बड़ी गिरावट के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions)
बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष है। यह युद्ध अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। हाल ही में 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के बाधित होने की खबरों ने निवेशकों के बीच डर पैदा कर दिया है, क्योंकि दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल (Surge in Crude Oil Prices)
मध्य पूर्व में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $113 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से:
महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।
देश का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ता है।
कंपनियों की लागत बढ़ती है जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ता है।
3. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली (Aggressive FII Selling)
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला है। मार्च 2026 में अब तक FIIs लगभग ₹88,000 करोड़ से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं। वैश्विक अनिश्चितता के समय विदेशी निवेशक उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (जैसे अमेरिकी डॉलर या बॉन्ड) की ओर रुख करते हैं।
4. भारतीय रुपये में रिकॉर्ड गिरावट (Weakness in Indian Rupee)
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया आज अपने सर्वकालिक निचले स्तर (Record Low) ₹94 के करीब पहुंच गया। रुपये की कमजोरी से आयात महंगा हो जाता है और विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में रिटर्न कम हो जाता है, जिससे वे और अधिक बिकवाली करते हैं।
5. बैंकिंग और आईटी सेक्टर में दबाव
बाजार के दिग्गज शेयरों, विशेषकर HDFC Bank और बैंकिंग इंडेक्स में भारी बिकवाली देखी गई। इसके अलावा, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 4% से अधिक की गिरावट आई, जिससे रिटेल निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹14 लाख करोड़ की कमी आई।
संक्षेप में: वैश्विक युद्ध की स्थिति, तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाना इस क्रैश के पीछे के मुख्य ट्रिगर्स रहे हैं।

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